गोष्ठी में गजल के माध्यम से युवाओं को नशे की लत से दूर रहने की दी प्रेरणा
इसमें कवि बलविंद्र भनौत ने कविता 'मरने से नहीं, करने से बनती है' पेश कर वर्तमान में युवाओं को समस्याओं के प्रति सचेत किया। विजय बवेजा ने नशे पर अपनी गजल 'नशे का जहर उनके दिलों में यूं उतर आया है, सब कुछ लुटा के सुकून पाया है' पेश कर युवाओं को नशे जैसी लत के प्रति जागरूक किया। निशांत ने व्यंगयात्मक कविता 'चाय वाले कप' सुनाकर सभी को खूब हंसाया। निखिल बिश्नोई ने चुनावों पर कविता सुनाकर चुनावी माहौल को पेश किया। नवदीप भनौत ने प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र की गजल 'अहसास की खुशबू कहां, आवाज के जुगनू कहां' सुनाई। गोष्ठी में कलात्मक सिनेमा जगत के कलाकार शशि कपूर के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गोष्ठी में बृजेंद्र भलेरिया, सोहनलाल लोहमरोड, ओमप्रकाश कोलाया आदि मौजूद थे।
Post a Comment