शहादत को सलाम; बाड़मेर से श्री गंगानगर तक बनाई मानव शृंखला

एेतिहासिक अद्‌भुत अविस्मरणीय

14 अगस्त को भारत से अलग हुए पाक को 72 साल बाद फिर दिखाई हमने ताकत व एकता 
इसलिए क्योंकि..... बाड़मेर से शुरू कार्यक्रम में हर जाति-धर्म और आयुवर्ग के लाखों पुरुष-महिलाएं और बच्चों ने सारे भेद भुलाकर देशभक्ति का जज्बा दिखाया। 
इसलिए क्योंकि..... चार जिलों में मानव शृंखला बनाई । प्रदेश के सभी 33 जिलों के लोगों ने अलग-अलग संख्या में मौजूदगी दर्शाई।  
इसलिए क्योंकि .... बाड़मेर से श्रीगंगानगर तक इस 700 किलोमीटर लंबी मानव शृंखला में एक समय एक साथ साढे़ पांच लाख लोगों ने तिरंगा थामा और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
राजस्थान से सटे भारत-पाक बॉर्डर पर 700 किमी लंबी ऐतिहासिक मानव शृंखला ने मंगलवार को नया इतिहास रच दिया। बॉर्डर के चार जिले बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर तक मानव शृंखला में प्रदेशभर से 5.50 लाख लोग शरीक हुए। दोपहर 1 बजे कतार में खड़े सभी लोगों के राष्ट्रगान के साथ ही मानव शृंखला पूर्ण हो गई। दिल्ली से 2.5 लाख कागज और कपड़े के 50 हजार तिरंगे भी मंगवाए गए। सीएम राजे ने हेलीकॉप्टर से सरहदी जिलों में शहादत को सलाम मानव शृंखला कार्यक्रम का हवाई निरीक्षण किया। 
      पहली बार देश के प्रति प्रेम, जोश और जूनून के साथ एक घड़ी, एक कड़ी में लाखों लोगों ने अनूठी मिसाल कायम की। देश में यह पहली बार है, जब शहीदों को सलाम करने के लिए भारत-पाक बॉर्डर पर इतनी बड़ी ऐतिहासिक मानव शृंखला बनाई गई हो। शहीद स्मारक पर शहीदों काे सलाम कार्यक्रम हुआ। शहीद सर्किल की विशेष सजावट की गई थी।
अधिकारियों की कड़ी मॉनिटरिंग 
जिलों के कलेक्टर, एसपी स्वयं सुबह से दोपहर 1 बजे तक कई बार मानव शृंखला रूट का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। 
पीलीबंगा से भी करणपुर-पदमपुर बॉर्डर पर स्कूलों ,कॉलेजों एवं विभिन्न सामाजिक संस्थायों द्वारा बसों से पहुंचकर मानव शृंखला में सहभागी बने |
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